IIT BHU के शोधकर्ताओं ने कचरे के प्लास्टिक को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के जरिए बेकार प्लास्टिक को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदला जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रयोगशाला में किए गए शोध को अब औद्योगिक स्तर पर उत्पादन और राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में इस्तेमाल तक पहुंचाया गया है।
इस तकनीक का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर करीब एक किलोमीटर लंबी दो लेन की सड़क तैयार की गई है। इससे कचरे के प्लास्टिक के निस्तारण के साथ सड़क निर्माण में वैकल्पिक सामग्री के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ी हैं। शोध को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के वित्त पोषण से आगे बढ़ाया गया है।
IIT BHU के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रयोगशाला स्तर पर विकसित तकनीक को वास्तविक सड़क निर्माण में लागू करना इसके व्यावहारिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तकनीक के आगे विस्तार से प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन और सड़क निर्माण, दोनों क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।


