शारदीय नवरात्र के चौथे दिन बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित प्राचीन मां दुर्गा मंदिर में मां कूष्मांडा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिर में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने मां को नारियल, चुनरी, लाल फूलों की माला और मिष्ठान अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मां के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना करने वाली आदिशक्ति के रूप में पूजित हैं। मान्यता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब मां की मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई। उनका निवास सूर्यमंडल के मध्य माना जाता है। नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मंदिर के पुजारी सोनू महाराज ने मां की पूजा-अर्चना और प्रसाद के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु मां को नारियल, चुनरी, पुष्प और मिष्ठान अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ का सुचारु प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहता है।
नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ काशी की धार्मिक परंपरा और मां के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बनी रही।


