भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU) के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर गैर-शैक्षणिक कर्मचारी फोरम ने संस्थान प्रशासन को प्रथम अनुस्मारक पत्र भेजा है। फोरम ने आरोप लगाया कि कई बार पत्र भेजने के बावजूद समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई। ऐसे में प्रशासन से 10 दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई है।
फोरम के अनुसार, कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर 3 अगस्त, 19 अगस्त, 1 सितंबर, 11 सितंबर और 16 सितंबर को पत्र भेजे गए थे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। फोरम का कहना है कि नवंबर 2024 से लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि कई समस्याएं पिछले 8 से 10 वर्षों से लंबित हैं।
कर्मचारियों ने डीओपीटी के नियमानुसार वित्तीय उन्नयन का लाभ देने, मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए लिखित परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने, संविदा और स्थायी कर्मचारियों का निर्धारित अनुपात बनाए रखने तथा आवास आवंटन की समस्या दूर करने की मांग उठाई है। इसके अलावा उच्च शिक्षा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की प्रक्रिया सरल करने, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करने और लेवल-9 को पूर्ण रूप से बहाल करने की मांग भी शामिल है।
फोरम ने सेवानिवृत्त सहित अन्य कर्मचारियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए संस्थान स्तर पर समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि 10 दिनों में ठोस समाधान नहीं होने पर कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेंगे।


