वाराणसी के सिगरा में पेट्रोल पंप कारोबारी नीलम सिन्हा के साथ 35 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने कारोबारी के नाम पर अकाउंटेंट को भरोसे में लिया और पेट्रोल पंप के मैनेजर से अलग-अलग बैंक खातों में मोटी रकम जमा करा ली। इतना ही नहीं, पैसे मिलने के बाद आरोपियों ने क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर मैनेजर पर दबाव भी बनाया। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
जांच में सामने आया कि ठगों ने 7 अक्टूबर को अकाउंटेंट सच्चिदानंद मिश्रा के मोबाइल पर ऐसा मैसेज भेजा, जिससे उसे लगा कि निर्देश कारोबारी की ओर से आया है। दरअसल, संबंधित नंबर उसके फोन में मालिक के नाम से दर्ज था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने पेट्रोल पंप से जुड़े लेनदेन करवाए। अगले दिन मैनेजर को अलग-अलग बैंक खातों में कुल 35 लाख रुपये भेजने के लिए कहा गया। मैनेजर ने निर्देश मानकर रकम भेज दी, लेकिन बाद में लेनदेन को लेकर संदेह पैदा हुआ।
ठगी के बाद आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर मैनेजर को धमकाया और कार्यालय में संपर्क करने को कहा। नीलम सिन्हा ने सोमवार को साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की, जिसके बाद सिगरा थाने में केस दर्ज किया गया। साइबर थाना प्रभारी उदयवीर सिंह के अनुसार, मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस धोखाधड़ी में किए जाने का आरोप है।


