ऐश्वर्या जायसवाल, प्रोफेसर योगेश कुमार आर्य के पर्यवेक्षण में मनोविज्ञान विषय की शोधछात्रा हैं, तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की पूर्व सीनियर रिसर्च फेलो हैं। वर्ष 2020 में वह इंटरनेशनल यूनियन ऑफ साइकोलॉजिकल साइंसेज (आईयूपीएसवाईएस), यूएन और डब्ल्यूएचओ द्वारा मान्यता प्राप्त एक व्यापक वैश्विक मनोवैज्ञानिक संगठन और इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ़ साइकोलॉजी (आईसीपी), विश्व का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक आयोजन द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित "इमर्जिंग साइकोलॉजिस्ट प्रोग्राम 2021 +" के लिए दुनिया भर से चुने गए 40 अंतरराष्ट्रीय प्रारंभिक करियर शोधकर्ताओं में शामिल थी।
साथ ही, ऐश्वर्या दृश्टिहीन और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए बेहतर कंप्यूटर उपयोग संभव करने वाले एक महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट का भी भाग है। बीएचयू के मनोविज्ञान विभाग के डॉ तुषार सिंह और ऐश्वर्या जायसवाल तथा सीडब्ल्यूआरयू (अमेरिका) और आईआईटी- बीएचयू (भारत) के शोधकर्ताओं की एक संयुक्त शोध टीम ने अपनी तरह का एक पहला प्रयोगात्मक अध्ययन किया जिसका उद्देश्य यह दिखाना था कि कंप्यूटर से बात-चीत करने के लिए हाव-भाव पर आधारित एक तकनीक जिसमें उंगलियों की सहायता से कंप्यूटर को टाइपिंग के लिए निर्देश दिए जाते हैं, दृष्टिहीन दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए एक संभावित कंप्यूटर इनपुट तकनीक है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नई खोज दृष्टिहीन व दृष्टिबाधित समुदाय को कंप्यूटर या कम्प्यूटरीकृत प्रणालियों के संचालन एवं विशेषज्ञता में सुधार करने में मदद करेगी, तथा उन्हें वर्तमान डिजिटल युग का हिस्सा बनने में सक्षम करेगी।
