काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बंद कर 50 से ज्यादा छात्र धरने पर बैठ गए। पुलिस मुकदमे को लेकर नाराज छात्रों ने कैंपस से बाहर जाने और अंदर आने के रास्ते को पूरी तरह से रोक दिया। कैंपस के नरिया और दूसरे छोटे गेटों पर काफी जाम जैसी स्थिति रही। छात्रों ने जमकर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। BHU में हिंदी पीजी के छात्र चंदन सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हे झूठे मुकदमे में फंसाया गया और जान से मारने की धमकी दी जा रही है।चंदन ने कहा कि वह 18 मई की रात हॉस्टल से लाइब्रेरी की ओर जा रहे थे। तभी रास्ते में 6 लड़के रॉड, डंडे और बेल्ट के साथ मारपीट कर रहे थे। मेरे द्वारा हस्तक्षेप किए जाने पर उन्होंने मुझे मारा-पीटा। इसके बाद मैं अपनी जान बचाते हुए हिंदी विभाग के सीनियर्स के रूम में घुस गया। हमलावर वहां पहुंचे इसके बाद गाली-गलौज करते हुए धमकाने लगे। उसी दौरान मेरे दो दोस्त मुझे लेने के लिए मौके पर पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई।
क्रिकेट ग्राउंड पर भी मारपीट की गई, जहां पर सीनियर्स द्वारा हमें बचाया गया।\ छात्र चंदन ने कहा कि इसके बाद मुझे और तीन साथियों को फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया।छात्र ने कहा कि पुलिस से अपील है कि दोषियों पर ठोस कार्रवाई करते हुए मेरी जाने बचाने की कृपा करें। नाराज छात्रों का यह भी कहना रहा कि एक पक्ष की तहरीर लिखी गई है जबकि दूसरे पक्ष कि तहरीर पुलिस ने लिखी नहीं है। छात्रों ने तकरीबन 1 घंटे तक सिंह द्वार पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जिससे यातायात बाधित रहा। मौके पर पहुंचे एसीपी प्रवीण सिंह ने छात्रों को समझाया और धरने पर बैठे छात्रों को उनके तरफ से भी FIR दर्ज होने का आश्वासन दिया. जिसके बाद छात्रों ने अपना धरना समाप्त किया।
