उत्तम पत्रकारिता का उद्देश्य भारत की संस्कृति एवं भारत की मौलिकता को बनाये रखना है। समाज के ताने बाने को बनाये रखना तथा समाज को सही दिशा देना वास्तविक पत्रकारिता का अर्थ है। पत्रकार धर्म का पालन करते हुए सारा समाज हमारा है, इस भावना के प्रति प्रमाणिकता रखना सच्ची पत्रकारिता है। ये विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में व्यक्त किया। वे विश्व संवाद केन्द्र, काशी द्वारा आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में "संवेदनशील पत्रकारिता की सामाजिक परिवर्तन में भूमिका' विषयक संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।
आद्य पत्रकार देवर्षि नारद के सन्दर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नारद जी का त्रिलोक में हर ओर संचार एवं संवाद था। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कृषि वैज्ञानिक प्रो. दिनेश चन्द्र राय ने कहा कि देवर्षि नारद ने महर्षि बाल्मिकी को रामायण की रचना के लिए प्रेरित किया। विश्व संवाद केन्द्र की भूमिका का वर्णन करते हुए कहा कि वर्तमान युग में समाज जागरण का अद्भुत कार्य इस संस्था के माध्यम से हो रहा है। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले चयनित सात पत्रकारों एवं एक कर्मयोगी समेत आठ लोगों को स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि को न्यास के उपाध्यक्ष डॉ. हेमन्त गुप्त, कार्यक्रम संयोजक सुरेश बहादुर ने स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम अध्यक्ष बिशन किशोर ने भेंट किया।कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन, महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा एवं भारत माता व आद्य पत्रकार देवर्षि नारद के चित्र पर मार्ल्यापण कर किया गया। कुलगीत मालविका एवं अंजलि द्वारा किया गया। इस अवसर पर राजेन्द्र सक्सेना, नागेन्द्र श्याम, प्रो. जे. पी. लाल, अरुण श्रीवास्तव, राजेश सिंह, प्रो. विनय सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
