निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत करने का महत्व है. कहा जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सालभर की एकादशी के फल की प्राप्ति हो जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी का महत्व
इस व्रत को लेकर धार्मिक मान्यता यह है कि यदि आप पूरे साल एक भी एकादशी का व्रत नहीं करते हैं और निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं तो आपको संपूर्ण एकादशियों का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास रखकर किया जाता है।
हिन्दू पंचाग अनुसार वृषभ और मिथुन संक्रांति के बीच शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। इस व्रत को भीमसेन एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि पाँच पाण्डवों में एक भीमसेन ने इस व्रत का पालन किया था और वैकुंठ को गए थे। इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी भी हुआ।

