भक्तिकालीन सन्त परम्परा के महान कवि कबीरदास की 625वीं जयंती पर बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र के शोध संवाद समूह द्वारा "कबीर:कल और आज” विषय पर विशेष परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के राहुल सभागार में किया गया जिसकी अध्यक्षता केंद्र के समन्वयक प्रो.श्रीप्रकाश शुक्ल ने की।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता उर्दू विभाग के आचार्य प्रो.आफताब अहमद आफ़ाक़ी ने वक्तव्य देते हुए कहा कबीर आम जनमानस में बेहद लोकप्रिय हैं क्योंकि कबीर बुनियादी तौर पर जनमानस के कवि हैं तथा जनसमाज के बारे में सोचते हैं। कबीर ने अपने समय की सत्ता के साथ कभी समझौता नहीं किया जो कि साहित्य का सबसे आधारभूत काम है। प्रो.आफ़ाक़ी ने कहा कि कबीर किताब के नहीं दिल के कवि हैं।वे प्रेम के कवि हैं। कबीर ने धर्म का विरोध नहीं किया बल्कि धर्म व्याप्त आडम्बरों का विरोध करते हुए ईश्वर से सीधा सम्बन्ध रखने की बात की।
इस अवसर पर युवा कवि व आलोचक डॉ. विंध्याचल यादव ने अपनी मौलिक तथा कबीर केंद्रित कविता 'कबीर का करघा' तथा परास्नातक के छात्र गोलेन्द्र पटेल ने भी कबीर पर लिखी अपनी कविता का पाठ किया।कार्यक्रम में आकर्षण के रूप में देश भर में अपने कबीर भजन गायन के लिए प्रसिद्ध 'ताना-बाना' समूह द्वारा कबीर के पदों का गायन भी किया गया। ताना-बाना समूह की ओर से देवेंद्र दास, डॉ. भगीरथ, गौरव तथा कृष्णा ने कार्यक्रम में कबीर के भजन की प्रस्तुति दी।कार्यक्रम का संचालन केंद्र के शोधार्थी शुभम चतुर्वेदी ने किया गया। कार्यक्रम में प्रो.प्रभाकर सिंह, प्रो.देवेंद्र मिश्र, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. प्रभात कुमार मिश्र, तथा शोधार्थियों एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।
