दुर्गापूजा की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस बार हथुआ मार्केट में बनने वाला पंडाल 110 फीट ऊंचा होगा और चामुंडेश्वरी मंदिर के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। यह पंडाल अपना 50वां वर्ष मना रहा है। इसमें माता की चलती हुई प्रतिमाएं और सेना के जवानों का मिशन सिंदूर को समर्पित दृश्य भी दर्शाए जाएंगे।पंडाल में मैसूर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई है, जिसके बाहर नंदी जी की मूर्ति भी स्थापित है। यह पंडाल शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन न तो घाट पर किया जाएगा और न ही तालाब या कुंड में, क्योंकि प्रशासन ने गंगा में विसर्जन पर रोक लगाई है और यह शास्त्रों के अनुसार भी उचित नहीं माना गया। इस पंडाल को बनाने में लगभग 150 कारीगर लगे और तीन महीने पहले से तैयारी शुरू हो गई थी।
कोलकाता और असम से आए कारीगर बांस और रंग-बिरंगे कपड़ों की मदद से पंडाल और माता की मूर्ति का निर्माण कर रहे हैं। चामुंडेश्वरी मंदिर का इतिहासचामुंडेश्वरी मंदिर 3489 फीट ऊँची चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित है और यह 1000 साल से भी अधिक पुराना है। मंदिर में मां दुर्गा के चामुंडा रूप की पूजा होती है और मंदिर के बाहर नंदी की मूर्ति भी स्थापित है, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है।
