भोपाल पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शाम रवींद्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि “भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में न फंसे। जो लोग समझना ही नहीं चाहते, वे हर हाल में बात को धूमिल करेंगे। जो जागकर भी सोया हो, उसे जगा नहीं सकते।”वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए।
उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक संबोधन था।धनखड़ ने कहा कि अब वे अंग्रेजी में ही संबोधन करेंगे, क्योंकि कई लोग उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर गलत नैरेटिव गढ़ देते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के व्यापक कॉन्सेप्ट को आज सीमित कर दिया गया है और कुछ लोग जानबूझकर तथ्य को गलत दिशा में ले जाते हैं।कार्यक्रम के अंत में जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा क्यों दिया, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया, अपनी गाड़ी में बैठे और बिना कुछ बोले वहां से रवाना हो गए।

