माघ मेला शुरू होने से पहले ही संतों का विरोध, जमीन और सुविधाओं को लेकर मेला प्राधिकरण पर हंगामा

प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेले से पहले संतों, तीर्थ पुरोहितों और सामाजिक संस्थाओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में बसने वाले इस ऐतिहासिक मेले में जमीन आवंटन और मूलभूत सुविधाएं न मिलने को लेकर पिछले 20 दिनों से मेला प्राधिकरण कार्यालय में हंगामा जारी है।विरोध की शुरुआत खाक चौक के संतों ने की थी, जो धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने भी मोर्चा खोल दिया। शनिवार, 27 दिसंबर को मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग कर दी। अब किसी को भी कार्यालय परिसर में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।पुष्कर पीठाधीश्वर महंत श्रवण देवाश्रम दंडी स्वामी काशी ने बताया कि पुष्कर मठ एक पुरानी संस्था है और 3 दिसंबर को माघ मेले के लिए जमीन भी आवंटित हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।

उन्होंने कहा कि टीन शेड और स्टील पंडाल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए बार-बार मेला कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।वृंदावन से आए गोपाल नंद गिरि महाराज ने आरोप लगाया कि वह वर्ष 1998 से निरंजनी अखाड़े से माघ मेले में आ रहे हैं, लेकिन इस बार न तो जमीन मिली और न ही सुविधाएं। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन और सुविधा देने के लिए पैसों की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि संतों को अपमानित किया जा रहा है और पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है।निराश्रय फाउंडेशन के शिवसागर शुक्ला ने बताया कि उनकी संस्था पहली बार माघ मेले में शिविर लगाने की तैयारी कर रही है, लेकिन जमीन आवंटन की प्रक्रिया बेहद जटिल और असुविधाजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नई संस्थाओं को जमीन देने की तिथि 26 दिसंबर तय थी, तो 25 दिसंबर को ही 46 नई संस्थाओं को जमीन कैसे आवंटित कर दी गई।वहीं मेला प्राधिकरण का दावा है कि भूमि आवंटन का कार्य पूरा हो चुका है। प्राधिकरण के अनुसार, कुल 4,900 संस्थाओं को जमीन आवंटित की जा चुकी है और इसकी सूचना कार्यालय पर चस्पा कर दी गई है। सूचना में स्पष्ट किया गया है कि भूमि आवंटन से संबंधित कार्य पूर्ण हो चुका है और मूलभूत सुविधाओं के लिए संबंधित सेक्टर कार्यालय से संपर्क किया जाए।हालांकि, बड़ी संख्या में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए मेला प्राधिकरण कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें कोई अधिकारी नहीं मिला।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कार्यालय में कोई मौजूद नहीं है, तो संत और संस्थाएं अपनी समस्याएं किससे रखें।गौरतलब है कि माघ मेले के लिए 2 दिसंबर से भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई थी। विभिन्न अखाड़ों, तीर्थ पुरोहितों, पुरानी और नई संस्थाओं को अलग-अलग तिथियों में जमीन दी गई। 22 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में माघ मेले की तैयारियों की समीक्षा कर 15 दिसंबर तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए थे, लेकिन हकीकत यह है कि मेला अब भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो सका है।पहला स्नान पर्व 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा) को होना है, लेकिन कई शिविरों में अब तक टीन शेड, पेयजल, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में माघ मेले का शुभारंभ आधी-अधूरी तैयारियों के बीच होने की आशंका है।माघ मेले की तैयारियों का दावा प्रशासन के अनुसार, माघ मेला करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में बसाया जा रहा है। मेले में 9 पांटून पुल बनाए जा रहे हैं। 160 किलोमीटर क्षेत्र में चकर प्लेट बिछाई गई है। जल निगम द्वारा 242 किलोमीटर क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन और 85 किलोमीटर में सीवर लाइन बिछाई जा रही है। वहीं, पावर कॉरपोरेशन की ओर से 47 किलोमीटर एचटी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है।





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