हजरत अली समिति के तत्वावधान में मौला-ए-कायनात हजरत अली की विलादत के अवसर पर भव्य मौला अली जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और पूरे अकीदत व एहतराम के साथ जश्न मनाया गया।जुलूस टाउन हॉल से प्रारंभ होकर काली महाल होते हुए दरगाह फातमान तक पहुंचा।
इस दौरान “या अली” के नारों से माहौल गूंज उठा और रास्ते भर लोगों ने जुलूस का स्वागत किया।मीडिया से बातचीत में मौलाना शाहिद अब्बास ने बताया कि मौला-ए-कायनात हजरत अली की विलादत की तारीख है और इसी खुशी में हर वर्ष यह जुलूस निकाला जाता है।
मौलाना शाहिद अब्बास ने कहा कि हजरत अली ने कभी शिया-सुन्नी या अपने-पराए का भेद नहीं किया, बल्कि इंसानियत को सबसे ऊपर रखा। अगर मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत जिंदा है, तो समाज और आवाम भी मजबूत रहेंगे—यही संदेश इस जुलूस के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाता है।जुलूस के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग पर शांति, सौहार्द और भाईचारे का माहौल बना रहा।

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