‘एक देश–एक पंचांग’ की दिशा में बड़ा कदम, BHU में बनेगी 1 करोड़ की लघु वेधशाला

दुनिया में एक देश–एक पंचांग की मुहिम को मजबूती देने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में 1 करोड़ रुपये की लागत से लघु वेधशाला का निर्माण किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बीएचयू के ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी की देखरेख में आगे बढ़ेगा।इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें केवल वेद और शास्त्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान की भी मदद ली जाएगी। सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक स्थिति का गहन वैज्ञानिक अध्ययन कर त्योहारों की तिथियों को लेकर वर्षों से चले आ रहे मतभेदों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।प्रोफेसर शत्रुघ्न त्रिपाठी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से देशभर के ज्योतिषाचार्यों के सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इन सम्मेलनों के दौरान सामने आए शोध और निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए अब इस योजना को बड़े स्तर पर लॉन्च किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष यह समस्या सामने आती है कि एक ही त्योहार दो अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है। इस भेद को समाप्त करने के लिए प्रयोगात्मक और वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।उन्होंने बताया कि लघु वेधशाला का स्वरूप लगभग एक वर्ष के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। उम्मीद है कि वर्ष 2027 से प्रकाशित होने वाले पंचांग में तिथियों को लेकर कोई भ्रम नहीं रहेगा और इसका लाभ न केवल देश बल्कि पूरे विश्व को मिलेगा।इस लघु वेधशाला से ज्योतिष विभाग और भौतिकी विभाग के M.A. और M.Sc. स्तर के छात्रों को सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों, नक्षत्रों, ग्रहण, सौर विकिरण, लम्बन (Parallax) और खगोलीय परिवर्तनों का प्रत्यक्ष प्रायोगिक अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। प्राचीन गणितीय सूत्रों से प्राप्त रवि-चंद्र के मानों की तुलना आधुनिक दूरदर्शक यंत्रों (टेलीस्कोप) से प्राप्त परिणामों से की जाएगी, जिससे दोनों पद्धतियों के बीच के अंतर और उनके कारणों को वैज्ञानिक रूप से समझा जा सकेगा।इस योजना की विशेषता यह भी है कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ा गया है।

प्राचीन छाया-वेध यंत्र, पत्थर और धातु से बने पारंपरिक उपकरणों से किए गए मापों की तुलना आधुनिक टेलीस्कोप, बाइनाकुलर और तारामंडल तकनीक से की जाएगी। इससे गणितीय मानकों में समयानुसार आवश्यक ‘बीजकर्म’ (संशोधन) को समझने में सहायता मिलेगी और पंचांग निर्माण के साथ-साथ मौसम पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी शोध को बढ़ावा मिलेगा।गौरतलब है कि बीएचयू के ज्योतिष विभाग की स्थापना वर्ष 1918 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने प्राची और प्रतीची ज्ञान-विज्ञान के समन्वय के उद्देश्य से की थी। विभाग दशकों से अध्ययन, अध्यापन और पंचांग प्रकाशन के माध्यम से समाजहित में कार्य करता आ रहा है, लेकिन प्रायोगिक सुविधाओं के अभाव में उन्नत शोध प्रभावित हो रहा था। लघु वेधशाला के निर्माण से अब उस कमी को दूर करने और महामना की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



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