गंगा में नावों की भी होगी नंबरिंग, अवैध संचालन पर कसेगा शिकंजा

काशी में गंगा नदी पर लगातार बढ़ती नावों की संख्या अब आस्था और पर्यटन के साथ-साथ प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। गंगा घाटों पर अवैध कब्जे, मारपीट और अव्यवस्था की घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हालिया वाराणसी दौरे के दौरान नाराजगी जताई थी और प्रशासन से इस पर लगाम लगाने के लिए ठोस प्लानिंग की रिपोर्ट मांगी थी।मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब प्रशासन ने गंगा में नाव संचालन को व्यवस्थित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। प्रस्तावित योजना के तहत गंगा में चलने वाली नावों का भी वाहनों की तरह पंजीकरण किया जाएगा। हर नाव को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जिससे अवैध संचालन पर प्रभावी रोक लग सके और किसी भी घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सके।


हाल के दिनों में गंगा घाटों और नावों पर हुई मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि घाटों को किसी भी विशेष विचारधारा या अराजक गतिविधियों से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा घाट श्रद्धालुओं के लिए पवित्र स्थल हैं, वहां धरना-प्रदर्शन, अव्यवस्था या गुंडागर्दी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।सीएम ने पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि घाटों पर उपद्रवियों और घाटों की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। घाटों पर पुलिस बीट बढ़ाने, नियमित पेट्रोलिंग और सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अराजकता को समय रहते रोका जा सके।


अब तक गंगा में नाव संचालन की अनुमति देने और किराया तय करने का अधिकार नगर निगम के पास था। नगर निगम ही नावों को परमिशन देता था और घाटों पर संचालन से जुड़े नियम बनाता था, ताकि पर्यटकों और श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली न हो। हालांकि निगरानी की कमी और नियमों के ढीले पालन के चलते बड़ी संख्या में नावें बिना वैध अनुमति के ही गंगा में उतर गईं, जिससे व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी।अवैध और अनियंत्रित नाव संचालन के चलते गंगा में दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ता गया। हर महीने छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आती रहीं, जिनमें नावों का असंतुलित होना या आपस में टकराना शामिल है। नदी में ट्रैफिक बढ़ने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट जल यातायात प्रणाली लागू नहीं थी। न नावों के लिए अलग लेन तय थी और न ही उनकी स्पष्ट पहचान, जिससे हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता था।प्रशासन का मानना है कि नावों के पंजीकरण और नंबरिंग से यह साफ हो सकेगा कि कौन-सी नाव वैध है और कौन-सी अवैध। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि गंगा में नाव संचालन को भी व्यवस्थित और नियंत्रित किया जा सकेगा।


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