पारिवारिक दुश्मनी के चलते 12 साल की उम्र में एसिड अटैक का शिकार हुईं मंगला कपूर आज देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से सम्मानित होंगी। केंद्र सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा होते ही उनके घर में खुशी का माहौल है। बधाई देने वालों के फोन लगातार आ रहे हैं और पूरे क्षेत्र में गर्व की लहर है।एसिड अटैक के बाद मंगला कपूर को करीब 6 साल तक अस्पताल में रहना पड़ा, इस दौरान उनके 36 ऑपरेशन हुए। असहनीय दर्द, लंबा इलाज और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। जीवन की इस कठिन यात्रा को उन्होंने अपने हौसले और आत्मविश्वास से नई दिशा दी और आज वे एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
मंगला कपूर ने बताया कि उन्होंने पद्म पुरस्कार के लिए इससे पहले दो बार आवेदन किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। इससे उम्मीद टूटने लगी थी, हालांकि तीसरी बार आवेदन करने पर उन्हें यह सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनका नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जिसने कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखा।
पद्मश्री मिलने पर मंगला कपूर का बयान
मंगला कपूर ने कहा, “इस खुशी को शब्दों में बयान करना बहुत मुश्किल है। जो मैं महसूस कर रही हूं, उसे समझा पाना आसान नहीं है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक पद्मश्री मुझे मिलेगा। कहीं न कहीं यह मेरे जीवनभर के संघर्ष का परिणाम है।”उन्होंने आगे कहा कि यह उपलब्धि वे अपने माता-पिता, गुरुजनों और भगवान को समर्पित करती हैं। “मेरे परिवार, खासकर मेरे भाई का सहयोग मेरे लिए बहुत अहम रहा है। उनके आशीर्वाद और समर्थन के बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती,” उन्होंने भावुक होते हुए कहा।
आज मंगला कपूर न सिर्फ अपने व्यक्तिगत संघर्ष की विजेता हैं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश भी हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, हौसला और संकल्प इंसान को नई पहचान दिला सकता है। पद्मश्री सम्मान के साथ उनका संघर्ष अब देशभर के लिए प्रेरणा बन गया है।

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