सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मंगल की प्रतीक मां मंगला गौरी का मना दिव्य अन्नकूट महोत्सव, 56 भोग की सजी झांकी

मां मंगला गभस्तीश्वर सेवा समिति के तत्वावधान में अन्नकूट महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न हुआ और मंदिर को सुगंधित पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया।महोत्सव के दौरान माता मंगला गौरी का विशेष श्रृंगार कर पूजन-पाठ किया गया और भक्तिमय माहौल में आरती उतारी गई। माता को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिली। 

अन्नकूट महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने माता के दर्शन-पूजन कर माला, फूल और नारियल अर्पित किए। इसके उपरांत आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने माता का प्रसाद ग्रहण किया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से नारायण गुरु, दीपक कुमार पाण्डेय, मनोज पाण्डेय, नरेंद्र पाण्डेय, विशेश्वर शास्त्री, श्याम सुन्दर सिंह, कमल सिंह, राजू वर्मा सहित समिति के दर्जनों सेवक और भक्तगण उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण बना रहा।मां मंगला गौरी को शक्ति और सौभाग्य की देवी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मां मंगला गौरी का दर्शन करने से वैवाहिक सुख, संतान सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन में मंगल की प्राप्ति होती है।

विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित महिलाएं दांपत्य जीवन की सुख-शांति के लिए मां का पूजन करती हैं।मान्यता है कि मां मंगला गौरी की पूजा करने से ग्रह दोष, विशेषकर मंगल दोष का निवारण होता है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। अन्नकूट, नवरात्रि और विशेष पर्वों पर किए गए दर्शन और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है।काशी में स्थित मां मंगला गौरी मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को आंतरिक शांति, मानसिक बल और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं और अपने भक्तों को संकटों से रक्षा प्रदान करती हैं।



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