बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है। इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ राजनीतिक उम्मीदवार वोट हासिल करने के लिए बेहद भड़काऊ और नफरत फैलाने वाले बयान दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक सार्वजनिक सभा में कथित तौर पर “हिंदुओं को मार डालो” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी हो गई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की बयानबाज़ी का उद्देश्य मतदाताओं को उकसाना और धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए राजनीतिक लाभ लेना है। मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक बताया है।स्थानीय अल्पसंख्यक समुदायों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नफरत फैलाने वाले भाषण चुनाव आचार संहिता और मौजूदा कानूनों का उल्लंघन हो सकते हैं।
चुनाव आयोग और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे ऐसे बयानों पर त्वरित संज्ञान लें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने और निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है।विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी दलों और उम्मीदवारों की जिम्मेदारी है। भड़काऊ बयान न केवल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक छवि को भी नुकसान पहुँचाते हैं।

.jpeg)
