भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है। न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाए जाने के विरोध में प्रदेश के बागवान मंगलवार को शिमला पहुंचे और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की।बागवानों ने सीएम से मांग की कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में किया गया सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 प्रतिशत करने का वादा पूरा कराया जाए। बागवानों का कहना है कि यदि आयात शुल्क नहीं बढ़ाया गया तो हिमाचल का सेब उद्योग गंभीर संकट में आ जाएगा।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के बाद मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि बागवानों की मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके बावजूद इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई गई तो बागवानों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।दरअसल, प्रधानमंत्री बनने से पहले वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने हमीरपुर के सुजानपुर में सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 प्रतिशत करने का वादा किया था। हालांकि बाद के वर्षों में ड्यूटी बढ़ाने के बजाय उसमें लगातार कटौती की गई। पहले वाशिंगटन एप्पल पर इम्पोर्ट ड्यूटी 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत की गई और अब न्यूजीलैंड के सेब पर इसे 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।बागवानों को आशंका है कि इससे देश में सस्ते आयातित सेब की बाढ़ आ जाएगी, जिसका सीधा असर हिमाचल प्रदेश के करीब 5,500 करोड़ रुपये के सेब उद्योग और तीन लाख से अधिक बागवान परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा।
यही नहीं, इसका प्रभाव जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने कहा कि देश की एप्पल इंडस्ट्री को बचाने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत की जानी चाहिए थी, ताकि घरेलू उत्पादक सस्ते आयातित सेब से प्रतिस्पर्धा कर सकें। लेकिन केंद्र सरकार उल्टा आयात शुल्क कम कर रही है, जिससे बागवानों की मुश्किलें बढ़ेंगी।स्टोन फ्रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष और सेब बागवान दीपक सिंघा ने कहा कि भारत–न्यूजीलैंड समझौते के बाद देश में सेब का आयात और बढ़ेगा, जिससे बाजार में कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि अप्रैल से अगस्त के बीच हिमाचल का सेब बाजार में नहीं आता।कुल मिलाकर, FTA के बाद इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती ने हिमाचल के सेब बागवानों की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

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