कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य परेड में भारत की सैन्य शक्ति, आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय हथियारों की मारक क्षमता की झलक ने दर्शकों का ध्यान खींचा।‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता के माध्यम से विजय’ थीम पर आधारित भारतीय सेना की झांकी ने राष्ट्र के विकसित सैन्य सिद्धांत का सशक्त और प्रभावशाली चित्रण प्रस्तुत किया।
झांकी के माध्यम से सटीकता, एकीकरण और स्वदेशी श्रेष्ठता की दिशा में हुए निर्णायक बदलाव को दर्शाया गया। इसमें यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि अब भारत संयुक्त, निर्णायक और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति के युग में प्रवेश कर चुका है।ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और विकसित भारत–2047 की दिशा में देश की अडिग प्रगति को रेखांकित किया गया। झांकी में दिखाया गया कि भारत का रक्षा भविष्य आत्मनिर्भर, समन्वित और अटूट क्षमताओं से परिभाषित होगा। तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त संचालन की यह कहानी गतिशील और क्रमबद्ध प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत नजर आई।
परेड के दौरान भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता के प्रतीक धनुष गन सिस्टम और अमोघ (एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम–ATAGS) को भी कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित किया गया, जिसने आत्मनिर्भर भारत और रक्षा निर्माण में तकनीकी सशक्तिकरण को मजबूती से सामने रखा।इसके अलावा परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणालियां, गहन मारक क्षमता वाला ‘सूर्यास्त्र’ रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और अर्जुन युद्धक टैंक भी आकर्षण का केंद्र रहे। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष पहली बार नवगठित ‘भैरव लाइट कमांडो’ बटालियन, शक्तिबन रेजिमेंट, ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट भी परेड में शामिल किए गए।77वें गणतंत्र दिवस की यह परेड भारत की सैन्य शक्ति, संयुक्त संचालन क्षमता और आत्मनिर्भरता के संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आई, जिसने देशवासियों में गर्व और आत्मविश्वास का संचार किया।

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