प्रयागराज में संगम की रेती पर चल रहे माघ मेले में देशभर से साधु-संतों का जमावड़ा लगा हुआ है। इसी बीच मेले में पहुंची महिला महामंडलेश्वर कृष्ण माता श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कृष्ण माता का दावा है कि उन्होंने अफसरशाही की चमक-दमक छोड़कर संन्यासी जीवन अपना लिया और अब पूरी तरह ईश्वर की साधना में लीन हैं।कृष्ण माता ने बताया कि वह पहले चेन्नई में कस्टम विभाग में ग्रेड-वन अधिकारी थीं। करीब 13 वर्ष पहले उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर संन्यास का मार्ग चुन लिया। आज वह कैविल्य महिला अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में साधना कर रही हैं।कृष्ण माता का मूल नाम राध्येय कृष्णा है और वह तमिलनाडु के श्रीरंगम की रहने वाली हैं। वर्तमान में माघ मेले के दौरान अरैल घाट पर उनका शिविर लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में नौकरी के दौरान वह मथुरा आई थीं, जहां मधुसूदन स्वामी के आश्रम में रुकने के दौरान साधु-संतों के जीवन से गहराई से प्रभावित हुईं।
इसी के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया और संन्यासी जीवन अपना लिया। वर्ष 2016 में उन्होंने अपने गुरु मधुसूदन स्वामी से दीक्षा प्राप्त की।कृष्ण माता का कहना है कि उन्होंने अपने पूर्व जीवन का पूरी तरह त्याग कर दिया है। अब उन्हें न तो अपने अफसर होने की याद है और न ही सांसारिक मोह-माया से कोई लगाव। उनके लिए राधे-कृष्ण ही सर्वस्व हैं। वर्तमान में वह वृंदावन के तपोवन में रहकर साधना कर रही हैं और माघ मेले के अवसर पर प्रयागराज आई हैं।उन्होंने बताया कि उनकी संस्था का नाम कैविल्य महिला अखाड़ा है, जो अभी 13 अखाड़ों में शामिल नहीं है। किन्नर अखाड़े की तरह कैविल्य अखाड़ा भी एक अलग पहचान रखता है। कृष्ण माता इस अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर हैं और इसमें कई महिला संत और साध्वियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महिला अखाड़े को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी के समक्ष उनके अखाड़े को शामिल करने का विषय रखा गया है, वहीं दिगंबर अखाड़े से भी बातचीत चल रही है।
महिला अखाड़े के शाही स्नान को लेकर कृष्ण माता ने कहा कि महाकुंभ में महिला अखाड़े ने शाही स्नान सामूहिक रूप से किया था, लेकिन उनकी इच्छा है कि कैविल्य महिला अखाड़ा अलग शाही स्नान करे। इसकी तैयारियां की जा रही हैं। 15 जनवरी को उनके गुरु के आगमन पर सभी साध्वियां एक साथ शाही स्नान करेंगी।कृष्ण माता ने अपने तपस्वी जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने संन्यास ग्रहण करने के बाद अन्न का त्याग कर दिया है। वह एक समय फल और एक समय जल का सेवन करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से दान-दक्षिणा या किसी प्रकार का लाभ नहीं चाहिए। यह जीवन पूरी तरह ईश्वर को समर्पित है।गौरतलब है कि ब्रज नगरी मथुरा में तीर्थ विकास ट्रस्ट की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कृष्ण माता को सम्मानित किया था। इस कार्यक्रम में कैविल्य महिला अखाड़े की ओर से उनका नाम शामिल किया गया था।

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