महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने एक बार फिर अपने बयान से सुर्खियां बटोरी हैं। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लगातार हो रही आलोचनाओं से आहत हर्षा ने साफ कहा कि किसी लड़की के चरित्र पर सवाल उठाना समाज के लिए सबसे आसान काम बन गया है। उन्होंने कहा, “मैं सीता नहीं हूं कि हर बार खुद को साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा दूं।”
हर्षा रिछारिया ने यह भी संकेत दिए कि यदि इसी तरह की मानसिकता और दबाव बना रहा, तो वह धर्म की राह से दूरी बनाने पर मजबूर हो सकती हैं। उनका कहना है कि आस्था निजी विषय है, लेकिन जब उसे लेकर किसी महिला की गरिमा पर प्रश्न उठाए जाते हैं, तो यह बेहद पीड़ादायक होता है।
उन्होंने समाज से अपील की कि महिलाओं को अपनी पसंद, आस्था और जीवन जीने की स्वतंत्रता दी जाए। हर्षा का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

.jpeg)
