77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देशवासियों को बधाई देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज का दिन बड़े-बड़े वादों की भूलभुलैया से निकलकर ईमानदार आत्ममंथन का है। यह देखा जाना चाहिए कि सरकारें सिर्फ छलावे की बातें कर रही हैं या फिर संविधान की सर्वसमाज हितैषी मंशा के अनुरूप राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र में वास्तविक प्रगति हुई है।मायावती ने संविधान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि आजादी के बाद 140 करोड़ की आबादी वाले देश में गरीबी और बेरोजगारी दूर करने में आखिर क्या हासिल हुआ है। उन्होंने कहा कि क्यों मुट्ठीभर अमीर और धन्नासेठ तरक्की कर रहे हैं, जबकि बहुजन समाज सरकारों के थोड़े-से अन्न का मोहताज बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत कभी नैतिक शक्ति के रूप में दुनिया को राह दिखाता था, लेकिन आज यह सवाल खड़ा होता है कि क्या वह स्थिति अब भी कायम है। क्या दुनिया आज भी भारत से सीख रही है या भारत दूसरों की नकल करने को मजबूर हो रहा है।घुसपैठियों और विदेशियों को वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया पर मायावती ने कहा कि यह कदम उचित है, लेकिन इसके नाम पर 100 करोड़ भारतीय नागरिकों को दस्तावेजों के जंजाल में फंसाना सही नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कोई सुगम और व्यावहारिक व्यवस्था अपनाई जाए, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।धर्म परिवर्तन के कड़े कानूनों पर भी मायावती ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद यह सिलसिला नहीं रुक रहा है, तो मूल समस्या की पहचान जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसकी आड़ में यदि विभाजनकारी राजनीति और हिंसा को बढ़ावा मिलता रहा, तो इससे देशहित को गंभीर नुकसान होगा।
बसपा प्रमुख ने बढ़ती महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जातिवाद और साम्प्रदायिकता को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज का जीवन स्तर लगातार गिर रहा है और भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। मायावती ने सरकारों से अपील की कि वे पूंजीवादी लाभ-हानि वाली सोच छोड़कर संविधान के “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर ईमानदारी से अमल करें, जैसा बसपा की यूपी सरकारों के दौरान किया गया।दुनिया के बदलते हालात में भारत की आर्थिक स्थिति पर कटाक्ष करते हुए मायावती ने कहा कि रुपये की गिरती हालत गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रुपया एक डॉलर के मुकाबले 100 तक पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।गणतंत्र दिवस के मौके पर मायावती का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने सरकारों की नीतियों और देश की मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।

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