मकर संक्रांति के पावन पर्व पर काशी में आस्था और श्रद्धा का विराट संगम देखने को मिला। भोर से ही दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर स्नान, पूजन-अर्चन और दान–पुण्य किया। हर ओर “हर हर महादेव” और “हर हर गंगे” के जयघोष गूंजते रहे।पर्व के मद्देनजर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे। गोदौलिया क्षेत्र में वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया, वहीं घाटों पर जल पुलिस, पुलिस प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह सक्रिय रहीं। लोगों को गहरे पानी में न जाने देने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा था। निषाद समाज के नाविक नावों के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था में जुटे रहे।
मकर संक्रांति के अवसर पर अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही लाखों स्नानार्थी गंगा स्नान कर मां गंगा का आचमन, जलाभिषेक और दान-पुण्य करते नजर आए। अस्सी घाट के तीर्थ पुरोहित बलराम मिश्रा ने बताया कि 14 जनवरी की रात्रि 9 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही पुण्यकाल प्रारंभ हो गया था। इस कारण रात्रि से ही श्रद्धालुओं ने स्नान और दान करना शुरू कर दिया।
अस्सी घाट के पुजारी पंडित बासुदेव ने बताया कि इस वर्ष मकर संक्रांति अत्यंत शुभ मुहूर्त में पड़ी है। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है तथा धन-धान्य की प्राप्ति होती है।अस्सी घाट पर खोजवा निवासी महिला श्रद्धालु अन्नपूर्णा पांडे से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह अपने पति, बच्चों, भाई-भाभी और रिश्तेदारों के साथ मकर संक्रांति पर गंगा स्नान एवं अन्नदान के लिए आई हैं। उन्होंने कहा कि गंगा स्नान के बाद मां गंगा की पूजा-अर्चना और अन्नदान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।पूरे दिन घाटों पर श्रद्धा, परंपरा और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली। मकर संक्रांति के अवसर पर काशी एक बार फिर आस्था की राजधानी के रूप में नजर आई।

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