कहते हैं बालक भगवान का स्वरूप होता है और जब इतनी कम उम्र में कोई बालक असाधारण प्रतिभा का परिचय दे, तो उसे ईश्वर का वरदान कहा जाता है। ऐसी ही एक विलक्षण प्रतिभा इन दिनों काशी में देखने को मिल रही है।समस्तीपुर, बिहार मूल के होमी प्रसाद शर्मा बीते चार वर्षों से अपनी पत्नी मनु शर्मा के साथ वाराणसी में निवास कर रहे हैं। उनके पुत्र त्रिशांक शर्मा, जिनकी उम्र मात्र 5 वर्ष है, ने कम उम्र में ही अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सभी को चौंका दिया है।
त्रिशांक अब तक पाँच गोल्ड मेडल जीत चुके हैं और आगामी मार्च माह में ब्लैक बेल्ट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। यदि वे इसमें सफल होते हैं, तो देश के तीसरे सबसे कम उम्र के ब्लैक बेल्ट धारक बनने की उपलब्धि हासिल करेंगे।खेल के साथ-साथ त्रिशांक की संगीत और आध्यात्म में भी गहरी रुचि है। वे कई संगीत वाद्य यंत्र बजाने में दक्ष हैं। विशेष रूप से पियानो पर राष्ट्रगान की प्रस्तुति देकर वे देश के सबसे कम उम्र के बच्चों में अपना नाम दर्ज कराने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा वे मंदिरों में भजन-कीर्तन में भी नियमित भाग लेते हैं।
त्रिशांक के पिता होमी प्रसाद शर्मा ने बताया कि उनके पुत्र का सपना भविष्य में एक सफल क्रिकेटर बनने का है। वे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हीं की तरह देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।काशी की पावन भूमि पर उभरती यह नन्ही प्रतिभा न केवल परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का विषय बन रही है।

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