मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर सियासत तेज हो गई है। भागीरथपुरा इलाके में कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई। बीजेपी कार्यकर्ता जहां “बाहरी लोग वापस जाओ” के नारे लगा रहे थे, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ता “घंटा पार्टी मुर्दाबाद” के नारे लगाते नजर आए। मौके पर मौजूद पुलिस ने हालात को संभालते हुए दोनों पक्षों को लगातार समझाइश दी।इधर, इंदौर में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। मृतकों में हीरालाल (65) भी शामिल हैं, जिनकी मौत 31 दिसंबर को हुई थी। भागीरथपुरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार, हीरालाल शीतल नगर लक्ष्मी नगर निवासी थे और किसी परिचित से मिलने आए थे, तभी उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। अस्पताल रिकॉर्ड में उनकी मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया। नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटा दिया गया है और आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को इंदौर नगर निगम का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।इसी बीच सरकार ने हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें दावा किया गया कि इंदौर में दूषित पानी से केवल 4 मौतें हुई हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के आंकड़ों के आधार पर 15 से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
गौरतलब है कि 1 जनवरी को हाईकोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। सरकार ने 5 दिन बाद रिपोर्ट दाखिल करते हुए 4 मौतों की पुष्टि की। 39 पेज की इस स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी मृतकों की उम्र 60 वर्ष से अधिक थी। रिपोर्ट के अनुसार, उर्मिला की मौत 28 दिसंबर को, तारा (60) और नंदा (70) की 30 दिसंबर को, जबकि हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई थी।दूषित पानी से मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष के दावों में विरोधाभास के चलते मामला और भी तूल पकड़ता जा रहा है।

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