नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल समाज में भ्रम और अविश्वास फैलाने का माध्यम बन रही है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से बनाए जा रहे फर्जी वीडियो और ऑडियो आम नागरिकों को गुमराह कर सकते हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया, सार्वजनिक विमर्श और संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी और कानूनी ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। राष्ट्रपति ने सरकार, तकनीकी कंपनियों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने की अपील की।राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है, ताकि लोग सही और गलत जानकारी के बीच अंतर कर सकें और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हो सके।

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