प्रयागराज। ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी कानूनी नोटिस के जवाब में विस्तृत विधिक उत्तर जारी किया गया है। यह जवाब सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अंजनि कुमार मिश्रा द्वारा 20 जनवरी 2026 को भेजा गया।जारी जवाब में मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा गया है कि 19 जनवरी 2026 को जारी किया गया पत्र न केवल अधिकार क्षेत्र से बाहर है, बल्कि मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और भेदभावपूर्ण भी है। आरोप लगाया गया है कि नोटिस को आधी रात में शिविर के प्रवेश द्वार पर चस्पा कर तामील किया गया, जिससे शंकराचार्य की गरिमा और सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।कानूनी जवाब में स्पष्ट किया गया है कि ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने 1 फरवरी 2017 को पंजीकृत वसीयत और घोषणा पत्र के माध्यम से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिषपीठ बदरिकाश्रम का उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।
12 सितंबर 2022 को वैदिक विधि-विधान के साथ लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में उनका विधिवत पट्टाभिषेक किया गया।जवाब में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस वसीयत को चुनौती देने वाली याचिका को गुजरात हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के दौरान भी यह तथ्य न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि पट्टाभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका है, जिसे कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया है।कानूनी नोटिस में कहा गया है कि द्वारका की शारदा पीठ, श्रृंगेरी मठ, पुरी की गोवर्धन पीठ और भारत धर्म महामंडल ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति का समर्थन किया है। इसके अलावा उनके द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में 10 करोड़ रुपये का मानहानि वाद भी दायर किया गया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।एडवोकेट अंजनि कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पद, उपाधि या अधिकारों पर किसी प्रकार की कोई स्थगन या निषेधाज्ञा लागू नहीं है।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यक्तियों ने झूठे दस्तावेजों के जरिए न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास किया, जिसके खिलाफ झूठी गवाही की कार्रवाई की मांग की गई है।जवाब में मेला प्राधिकरण के पत्र को न्यायालय में विचाराधीन विषय में हस्तक्षेप बताते हुए इसे अवमानना की श्रेणी में रखा गया है। अंत में प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि यदि 19 जनवरी 2026 का पत्र 24 घंटे के भीतर वापस नहीं लिया गया, तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मानहानि, सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका और अन्य कानूनी कार्यवाही शुरू की जाएगी।

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