शंकराचार्य बनाम यूपी सरकार विवाद में नया मोड़, जाति को लेकर उठे सवाल

शंकराचार्य और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रहे विवाद में एक और नया अध्याय जुड़ गया है। वाराणसी के तिलमापुर गांव के पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्र ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जाति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्र ने अपर पुलिस आयुक्त को पत्रक सौंपते हुए मांग की है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की जाति की विधिवत जांच कराई जाए। उनका आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद ब्राह्मण नहीं हैं, बल्कि वे भांट जाति से संबंध रखते हैं।नागेश्वर मिश्र का दावा है कि शंकराचार्य के पैतृक गांव के तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा भी उनकी जाति को लेकर स्पष्ट किया गया था कि वे भांट जाति से हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि यह आरोप सत्य पाया जाता है तो अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शंकराचार्य पद पर आसीन होना परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

पूर्व प्रधान ने कहा कि यह मामला आस्था, परंपरा और धार्मिक मर्यादाओं से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तथ्यों की पुष्टि के बाद उचित कार्रवाई की जाए।फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से भी आरोपों पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।




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