माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना लगातार जारी है। मौनी अमावस्या के अवसर पर पालकी (रथ) यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़कर गई थी। कड़ाके की ठंड के बीच उन्होंने पूरी रात अपने पंडाल में धरना दिया और बीते 23 घंटे से अनाज का एक दाना तक ग्रहण नहीं किया है। उन्होंने पानी पीना भी छोड़ दिया है।
सोमवार दोपहर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला क्षेत्र में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन स्वयं आकर माफी नहीं मांगता, तब तक वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे और फुटपाथ पर ही रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य परंपरा के अनुसार हमेशा पालकी में ही स्नान के लिए जाते रहे हैं और हर वर्ष यही व्यवस्था होती रही है।शंकराचार्य ने दो टूक कहा कि जब तक पुलिस-प्रशासन उन्हें सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ लेने नहीं आएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। उनके मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि शंकराचार्य ने रविवार से कुछ भी नहीं खाया है और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने पहुंचा है। सोमवार सुबह उन्होंने धरना स्थल पर ही अपनी पूजा और दंड तर्पण संपन्न किया।
इधर, मौनी अमावस्या के दिन रथ यात्रा के दौरान हुए विवाद का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी, जिसको लेकर शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है, जबकि शंकराचार्य का धरना लगातार जारी है। स्थिति को लेकर माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

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