वाराणसी में 8वां इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल सम्पन्न, भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के प्रतिष्ठित पंडित ओंकार नाथ ठाकुर ऑडिटोरियम में इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (IPAF) वाराणसी 2026 का 8वां संस्करण भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश के ख्यात कलाकारों, सांस्कृतिक प्रेमियों और गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता कर भारतीय परफॉर्मिंग आर्ट्स की समृद्ध परंपराओं का उत्सव मनाया।IPAF के विज़न के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ना, पारंपरिक कला रूपों को प्रोत्साहन देना, दिव्यांग कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना तथा उभरती एवं स्थापित प्रतिभाओं को वैश्विक पहचान दिलाना है। सोशल एंटरप्रेन्योर श्याम पांडे द्वारा स्थापित इस मंच ने पिछले नौ वर्षों में लद्दाख से त्रिवेंद्रम और इंफाल से अहमदाबाद तक 200 से अधिक सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय कला एवं संस्कृति को गौरवान्वित किया है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और कलाकारों को सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन में भारतीयता, सांस्कृतिक गौरव और कलात्मक एकता की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।शाम की मुख्य प्रस्तुतियों में प्रो. संगीता पंडित एवं समूह द्वारा बनारस घराने की परंपरा में शास्त्रीय एवं अर्धशास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया गया, जिसमें ठुमरी, दादरा, कजरी और चैती की भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. खिलेश्वरी पटेल एवं समूह ने “कृष्णवैभवम्” शीर्षक से भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुति दी, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर गीतोपदेश के दार्शनिक संदेश तक की दिव्य यात्रा को सजीव किया गया। वहीं जटाशंकर चोलर नृत्य दल ने विंध्य क्षेत्र की दुर्लभ चौलर लोकनृत्य परंपरा के माध्यम से मिर्जापुर की कजरी संस्कृति को मंच पर जीवंत कर विशेष सराहना प्राप्त की।आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग के लिए बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि IPAF न केवल कला और संस्कृति के संरक्षण का मंच है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिक दर्शकों के बीच एक सशक्त सेतु बनकर कलाकारों के लिए नए अवसरों का सृजन कर रहा है।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजकों ने घोषणा की कि IPAF अपने वैश्विक विस्तार के तहत डबलिन, लंदन, सिंगापुर, स्वीडन, मॉस्को और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में आयोजन की योजना बना रहा है, ताकि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाया जा सके।



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