विद्याश्री न्यास, श्रद्धानिधि न्यास एवं श्रमण विद्या संकाय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में योग साधना केन्द्र में पं. विद्यानिवास मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर संस्कृत कवि सम्मान, पं. मुनिवर मिश्र स्मृति व्याख्यान तथा संस्कृत कवि-गोष्ठी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण, वैदिक मंगलाचरण और शंखध्वनि के साथ हुआ तथा अध्यक्षता कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। इस अवसर पर वर्ष 2026 का ‘पं. रामरुचि त्रिपाठी संस्कृत कवि सम्मान’ विश्रुत विद्वान प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी को माला, उत्तरीय, प्रतीक-चिह्न, प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान-राशि के साथ प्रदान किया गया। स्मृति व्याख्यान में प्रो. द्विवेदी ने ‘साहित्यशास्त्र में भक्तिभाव एवं रस-पर्यावलोचन’ विषय पर आचार्य भरत से लेकर पंडितराज तक रस-तत्त्व की परंपरा का समीक्षात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए भक्ति-साहित्य की गहन व्याख्या की।
मुख्य अतिथि प्रो. वांगचुक दोर्जे नेगी ने पं. विद्यानिवास मिश्र को चलता-फिरता विश्वकोश बताते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आज की आवश्यकता कहा, वहीं विशिष्ट अतिथि श्री दीनदयाल पांडेय ने संस्कृति की रक्षा के लिए सज्जन-शक्ति को सजग रहने का आह्वान किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि पं. विद्यानिवास मिश्र भारतीय ज्ञान-परंपरा के साक्षात् प्रतिमूर्ति थे और शास्त्र तथा लोक के अद्भुत सेतु के रूप में उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के संतुलन को स्थापित किया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित संस्कृत कवि-गोष्ठी में अनेक विद्वानों ने काव्य-पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बड़ी संख्या में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।

