इलाहाबाद, 02 फरवरी 2026:उत्तर प्रदेश में कई असिस्टेंट टीचरों द्वारा जाली और मनगढ़ंत सर्टिफिकेट के आधार पर भर्ती होने की घटनाओं के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग को व्यापक जांच करने का आदेश देते हुए निर्देश दिया है कि ऐसी अवैध नियुक्तियों को छह महीने के भीतर रद्द किया जाए।हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती होने वाले शिक्षकों से उनके वेतन की वसूली की जाए और जिन अधिकारियों ने इसमें मिलभगत की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
आदेश में कहा गया है कि यह कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से न केवल शिक्षा विभाग की नियुक्तियों में सख्ती आएगी, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती लेने वालों के लिए भी सख्त संदेश जाएगा। इस कदम को राज्य में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में यूपी में ऐसे कई मामलों की रिपोर्टें आई थीं, जहां उम्मीदवारों ने असली दस्तावेजों की जगह जाली प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया। हाई कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में इस तरह की भ्रष्ट प्रथाओं पर रोक लगेगी और योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा।

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