वृंदावन, उत्तर प्रदेश। ब्रज की नगरी वृंदावन में होली का उत्सव इस बार भी पूरे उल्लास और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में ठाकुरजी को गुलाल अर्पित किया गया और श्रद्धालु भक्ति संगीत पर झूमते हुए नजर आए। मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के जयकारों से गूंज उठा।सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर देखी गईं। जैसे ही मंदिर के पट खुले, पुजारियों ने विधि-विधान से ठाकुरजी को रंग अर्पित किया। इसके बाद भक्तों पर भी गुलाल की वर्षा की गई, जिससे पूरा परिसर रंग-बिरंगा हो गया।
विदेशियों ने भी लिया उत्सव का आनंद वृंदावन की होली का आकर्षण देश ही नहीं, विदेशों तक फैला हुआ है। इस अवसर पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और अन्य देशों से आए पर्यटक भी पारंपरिक वेशभूषा में रंग खेलते नजर आए। कई विदेशी भक्तों ने कहा कि वृंदावन की होली का अनुभव अद्भुत है और यहां का माहौल प्रेम व भक्ति से भरा हुआ है। एक विदेशी श्रद्धालु ने बताया, “यहां की ऊर्जा और लोगों का उत्साह देखकर मन खुश हो गया। ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं मिला।”सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक-चौबंदभीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और मेडिकल टीम भी मौजूद रही।ब्रज की परंपरा और आस्था का संगमवृंदावन की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है। यहां की फूलों की होली, लठमार होली और फाग उत्सव विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। बांके बिहारी मंदिर में खेली जाने वाली होली को देखने और उसमें शामिल होने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।भक्ति, उल्लास और प्रेम के रंग में रंगा वृंदावन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि होली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम है।

