वाराणसी।जिले में यातायात पुलिस द्वारा वाहनों के विरुद्ध की जा रही कथित मनमानी कार्रवाई को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि वाहन के वैध कागजात और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) मौजूद होने के बावजूद गलत धाराओं में चालान किया जा रहा है और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207 के तहत वाहनों को सीज किया जा रहा है।ताजा मामला थाना चौक क्षेत्र का है। 27 जनवरी 2026 को वाहन संख्या UP 65 EV 5314 को थाना चौक में तैनात उप निरीक्षक आलोक कुमार यादव ने नंबर प्लेट न होने का हवाला देकर रोक लिया। आरोप है कि वाहन चालक द्वारा आरसी सहित सभी वैध दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत किए गए, इसके बावजूद वाहन को जबरन मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया और चालान कर कार्यालय भेज दिया गया।जबकि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (संशोधित 2007) में स्पष्ट प्रावधान है कि धारा 207 का प्रयोग केवल उसी स्थिति में किया जा सकता है, जब वाहन के पास आरसी या परमिट उपलब्ध न हो। मात्र नंबर प्लेट न होने की स्थिति में वाहन को सीज किया जाना कानूनन उचित नहीं माना जाता।
इस पूरे प्रकरण को लेकर अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 300(A) (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन बताया है। अधिवक्ता का कहना है कि जब वाहन के वैध कागजात मौके पर प्रस्तुत कर दिए गए थे, तब भी सीज की कार्रवाई पूरी तरह मनमानी और अवैधानिक है।मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा है। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी अरविंद मोहन को भी शिकायती पत्र भेजकर इस प्रकार की कथित गलत कार्रवाई पर रोक लगाने और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।अधिवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि आरसी और वैध कागजात होने के बावजूद इस तरह गलत धाराओं में वाहन सीज किए जाते रहे, तो आम नागरिकों का कानून और प्रशासन पर भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की कि यातायात नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए, लेकिन कानून की सही व्याख्या और दायरे में रहकर, न कि मनमानी के आधार पर।फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और नागरिकों के बीच इसे लेकर चिंता देखी जा रही है।

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