दालमंडी क्षेत्र में चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान के बीच एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मकान संख्या सीके 43/154 को ‘कसरे हिंद’ घोषित किए जाने के बाद से परिवार मानसिक तनाव में था। परिजनों का आरोप है कि इसी चिंता के चलते परिवार के मुखिया महंगू (बुजुर्ग) की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
पोते के साथ केक खाकर सोए, सुबह नहीं उठे
परिजनों के अनुसार महंगू पुरखों के समय से दालमंडी में रह रहे थे। उनके पोते विक्की ने बताया कि प्रशासन द्वारा मकान को ‘कसरे हिंद’ घोषित किए जाने के बाद दादा काफी परेशान रहने लगे थे।विक्की के मुताबिक, “बीती रात दादू ने हमारे साथ केक खाया, बातचीत की। हमने उन्हें समझाया तो उन्होंने कहा—सरकार छीन रही है तो छीन लेने दो, अब हम क्या कर लेंगे। इसके बाद वे सो गए, लेकिन सुबह उठे ही नहीं।”परिवार उन्हें तुरंत कबीरचौरा मंडलीय चिकित्सालय ले गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मलबे के कारण घर नहीं ले जा सके शव
परिजनों का कहना है कि क्षेत्र में गिरे मलबे और ध्वस्तीकरण की स्थिति के कारण वे शव को दोबारा अपने घर नहीं ले जा सके। अस्पताल परिसर में ही शव को नहलाकर अंतिम यात्रा निकाली गई।परिवार ने नाराजगी जताते हुए कहा, “ऐसा विकास नहीं चाहिए जो किसी की लाश पर होकर तय किया जाए।”
परिजनों में आक्रोश
विक्की ने आक्रोश जताते हुए कहा कि विकास कार्यों के नाम पर लोगों की भावनाओं और जीवन की अनदेखी की जा रही है। “अगर सरकार ने ठान लिया है कि 60 फीट की सड़क बनेगी, तो वह बनेगी—चाहे किसी की जान ही क्यों न चली जाए,” उन्होंने कहा।फिलहाल क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है। स्थानीय लोगों में तनाव और असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।

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