वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में “भारतीय ज्ञान परम्परा: प्राचीन बुद्धिमत्ता एवं सतत समाधान” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा पूर्व छात्रा सम्मेलन ‘आवर्तन–2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की एलुमनी एसोसिएशन द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, छात्राओं और पूर्व छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगीत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहुविषयक एवं मूल्यपरक दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत विकास लक्ष्यों—विशेष रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता और पर्यावरण संरक्षण—की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देती है।
अंतर्राष्ट्रीय अतिथि डॉ. शमा मित्तल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैश्विक उपयोगिता और पर्यावरणीय संतुलन में उसकी भूमिका को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता प्रो. चन्द्रकला पाडिया, पूर्व कुलपति, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय ने भारतीय चिंतन की दार्शनिक गहराई और व्यावहारिक आयामों पर विचार व्यक्त किए। वहीं प्रो. कल्पलता पाण्डेय, पूर्व कुलपति, जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति और सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में भारतीय शिक्षण परम्परा की उपयोगिता स्पष्ट की।मुख्य अतिथि उमा भट्टाचार्य ने छात्राओं को भारतीय मूल्यों के संरक्षण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया। पूर्व छात्राओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों में पेंटिंग, ललित कला, वैदिक गणित सामग्री और हस्तशिल्प आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का समापन इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. पूनम पाण्डेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

