काशी द्वार विवाद: किसानों की आवाज़ दबाने का आरोप गांव छावनी में तब्दील

वाराणसी:काशी द्वार परियोजना को लेकर किसानों द्वारा आयोजित बैठक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले ही प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। भारी संख्या में पीएसी और आरएएफ के जवानों ने गांव को चारों ओर से घेर लिया, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।प्रशासनिक कार्रवाई के तहत कई किसानों को हिरासत में लिया गया, जबकि दर्जनों किसानों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से गांव में अफरा-तफरी मच गई और किसानों में शासन व सत्ता के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिला।

किसानों का आरोप है कि वे अपनी जमीन, रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर बैठक करना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने उनकी आवाज़ को दबाने के लिए बल और दमन का सहारा लिया। किसानों का कहना है कि बिना किसी उकसावे के उन्हें रोका गया, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है।वहीं प्रशासन का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं।हालांकि, गांव में फैला तनाव और किसानों में बढ़ती नाराजगी यह संकेत दे रही है कि काशी द्वार को लेकर विवाद अब और गहराने की ओर बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।



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