नई दिल्ली। कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसले बुलंद हों तो सफलता की राह खुद बन जाती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है संजू रानी की, जिन्होंने सामाजिक दबाव और आर्थिक तंगी के बीच अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। शादी के नाम पर घर छोड़ने को मजबूर हुईं संजू ने संघर्षों से लड़ते हुए आखिरकार अफसर बनकर अपनी अलग पहचान बनाई।परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। कम उम्र में शादी का दबाव बढ़ने लगा तो संजू ने अपने सपनों को बचाने के लिए घर छोड़ने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में उनके सामने रहने और पढ़ाई जारी रखने की बड़ी चुनौती थी। खर्च चलाने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया।
दिन में पढ़ाई और शाम को ट्यूशन—यही उनकी दिनचर्या बन गई।संजू बताती हैं कि कई बार हालात इतने कठिन हुए कि पढ़ाई छोड़ने का मन बना, लेकिन लक्ष्य की याद उन्हें फिर खड़ा कर देती थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने आखिरकार सरकारी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और अफसर बन गईं।सफलता मिलने के बाद संजू रानी कहती हैं, “अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। जरूरी है कि खुद पर भरोसा बनाए रखें।”आज संजू रानी न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका मानना है कि लड़कियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर यह साबित करता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सपनों को सच किया जा सकता
है।
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