नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के संबोधन के बिना ही पारित हो गया। यह स्थिति वर्ष 2004 के बाद पहली बार देखने को मिली, जब सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लगातार टकराव होता रहा। विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन को संबोधित नहीं कर सके। अंततः प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।इस मुद्दे पर राज्यसभा में प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने संसदीय परंपराओं को चोट पहुंचाई है।
लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, लेकिन कांग्रेस अबोध बालक की तरह व्यवहार कर रही है और देश की राजनीति को उसका बंधक बना रही है।”नड्डा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का सदन में बोलना संसदीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसे बाधित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष से आत्ममंथन करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।उधर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार उनकी बातों को नजरअंदाज कर रही है, इसलिए विरोध प्रदर्शन करना मजबूरी बन गया है। विपक्ष का कहना है कि वे जनहित के मुद्दों पर जवाब चाहते थे।

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