महाशिवरात्रि पर बीएचयू का विश्वनाथ मंदिर शिवमय — भोर से ही उमड़ा आस्था का जनसैलाब

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी की आध्यात्मिक धरा एक बार फिर शिवमय हो उठी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। जैसे ही मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले गए, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।दूर-दराज से आए श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक करते नजर आए। मंदिर को विशेष रूप से फूलों और रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय दिखाई दिया। पूरे दिन रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और शिव आराधना का क्रम चलता रहा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपने परिवार सहित मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और समस्त काशीवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, स्थानीय नागरिकों तथा बाहर से आए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई थी। पुलिस बल के साथ स्वयंसेवकों की टीमें भी लगातार व्यवस्था संभालती नजर आईं, जिससे दर्शन-पूजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।भक्तों का विश्वास है कि महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शन और अभिषेक से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति का वास होता है। महाशिवरात्रि का यह उत्सव काशी की सनातन परंपरा, अटूट आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।




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