महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव की नगरी काशी अलौकिक भक्ति में डूबी नजर आई। बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देर रात्रि से ही मंदिर परिसर और आसपास की गलियों में भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। मंगला आरती संपन्न होने के बाद जैसे ही मंदिर के कपाट दर्शनार्थ खोले गए, भक्तों में बाबा की एक झलक पाने की अद्भुत उत्सुकता देखने को मिली।मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कतारबद्ध दर्शन, पेयजल, चिकित्सा एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखा गया। मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने स्वयं उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। पुष्पवर्षा होते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और जयकारों से वातावरण और भी भक्तिमय बन गया।
महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। आदियोगी महादेव और महामाया पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का साक्षी बनने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में काशी पहुंचे। स्वर्ण मंडित गर्भगृह में संपन्न होने वाले इस पावन विवाह समारोह में लोक और शास्त्र परंपराओं का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।शिवप्रिया काशी में भक्ति की ऐसी धारा बही कि पूरा शहर शिवमय हो गया। घाटों से लेकर गलियों तक, मंदिरों से लेकर आश्रमों तक हर ओर शिव आराधना की छटा बिखरी रही। महाशिवरात्रि पर काशी में उमड़ी आस्था और श्रद्धा ने यह संदेश दिया कि बाबा विश्वनाथ के प्रति भक्तों का अटूट विश्वास आज भी उतना ही प्रगाढ़ है।

