काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विधि संकाय द्वारा एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका की भूमिका, सहयोगात्मक शासन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएचयू के माननीय कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के विशेष प्रतिवेदक उपेन्द्र बघेल, आईपीएस उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। अपने विशेष व्याख्यान में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने “विकसित भारत के लिए सहयोगात्मक शासन में न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में न्यायपालिका की सक्रिय और संतुलित भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संविधानिक मूल्यों, सुशासन और संस्थागत समन्वय पर भी विस्तार से चर्चा की।
वहीं, उपेन्द्र बघेल, आईपीएस ने “अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच और अभियोजन की कुछ अंतर्दृष्टि” विषय पर व्याख्यान देते हुए वैश्विक स्तर पर आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन की चुनौतियों और मानवाधिकार संरक्षण की प्रक्रिया को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से भी अवगत कराया।कार्यक्रम के दौरान संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों ने अतिथियों से प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समापन अध्यक्षीय संबोधन के साथ हुआ, जिसमें कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए ऐसे अकादमिक आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।कार्यक्रम में विधि संकाय के शिक्षकगण, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं विश्वविद्यालय के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

.jpeg)