बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विश्वनाथ मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित हुए और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के समर्थन में मार्च निकाला। इस दौरान परिसर में नारेबाजी होती रही, वहीं स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया।SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों ने समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर यह मार्च निकालने की घोषणा की थी। छात्रों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अब भी संरचनात्मक जातिगत भेदभाव मौजूद है, जिसे समाप्त करने के लिए यूजीसी के नियमों को सख्ती से लागू किया जाना आवश्यक है।मार्च के दौरान छात्रों ने एक पत्र भी वितरित किया, जिसमें प्रवेश, मूल्यांकन, शोध, फेलोशिप, हॉस्टल आवंटन, नियुक्ति और पदोन्नति जैसी प्रक्रियाओं में SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए।
छात्रों ने विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इन समितियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने, शिकायत प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने की भी मांग उठाई।छात्रों की प्रमुख मांगों में यूजीसी के अनुरूप EOC का तत्काल गठन एवं अधिसूचना जारी करना, प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए Equity Committee का गठन, वेबसाइट पर सभी संबंधित सूचनाएं अपलोड करना, कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण और यूजीसी को समय पर पारदर्शी रिपोर्ट भेजना शामिल है।वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है।

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