नई दिल्ली:डेटा शेयरिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और वॉट्सऐप को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि भारत में काम करने वाली कोई भी कंपनी देश के नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कंपनी को भारत के नियम-कानून स्वीकार नहीं हैं, तो उसके पास देश छोड़ने का विकल्प खुला है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं, मेटा और वॉट्सऐप की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी है। यह जुर्माना वॉट्सऐप की डेटा शेयरिंग नीति को प्रतिस्पर्धा विरोधी मानते हुए लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है और इसकी सख्ती से रक्षा की जाएगी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियां अपनी गोपनीयता नीतियां इस तरह से तैयार करती हैं कि आम उपभोक्ता उनकी शर्तों और प्रभावों को ठीक से समझ ही नहीं पाता।शीर्ष अदालत ने इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करने की बात कही है। कोर्ट की इस टिप्पणी को डिजिटल कंपनियों और डेटा सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक अहम संकेत माना जा रहा है।

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