केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर कबीरचौरा स्थित पैलेस में व्यापारियों की एक बैठक आयोजित की गई, जहां बजट पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यापारियों ने बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उपस्थित व्यापारियों का कहना था कि यह बजट आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए कोई ठोस राहत नहीं देता, बल्कि इसे जनता के सामने केवल “लालीपॉप” बताया गया।गौरतलब है कि फरवरी 2026 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट रहा, जो भारतीय संसदीय इतिहास में एक रिकॉर्ड है। इस बार बजट का रविवार को पेश होना भी चर्चा का विषय रहा।
सरकार ने बजट में आत्मनिर्भर भारत, आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन को मुख्य फोकस बताया है। इसके तहत सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। साथ ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत, बायोफार्मा, रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा की गई है।इसके अलावा 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालित करने की योजना और एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का नया ग्रोथ फंड भी बजट में शामिल है। सरकार ने FY26 में 7.4 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि और फिस्कल डेफिसिट को 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है।
हालांकि व्यापारियों का कहना है कि बजट में बड़े प्रोजेक्ट्स और आंकड़ों की भरमार है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यापार, महंगाई और टैक्स से जूझ रहे छोटे कारोबारियों के लिए कोई ठोस राहत नहीं दिखती।बैठक में प्रमुख रूप से प्रमोद अग्रहरि (वाराणसी व्यापार मंडल, काशी प्रांत), महामंत्री शन्नि जौहर, बबलू अग्रहरि, सबिता सिंह (पूर्वांचल महिला व्यापार मंडल) और कीर्ति प्रकाश पांडे (कबीर रोड व्यापार मंडल) सहित कई व्यापारी नेता उपस्थित रहे।


