देश में राज्यों और शहरों के नाम बदलने की बहस के बीच अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलने की मांग भी उठने लगी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद ने हाल ही में सुझाव दिया कि दिल्ली का नाम उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप के अनुरूप बदला जाना चाहिए।क्या है पूरा मामला?भाजपा सांसद ने कहा कि दिल्ली का प्राचीन नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ रहा है, जिसका उल्लेख महाभारत काल में मिलता है। उनका तर्क है कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में राजधानी का नाम भी उसके ऐतिहासिक मूल से जुड़ा होना चाहिए।
सांसद ने यह भी कहा कि जैसे अन्य स्थानों के नाम बदले गए—उदाहरण के लिए इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजीनगर किया गया—वैसे ही दिल्ली के नाम पर भी गंभीर विचार होना चाहिए।क्या केरल से जुड़ा है मामला?हाल ही में केरल सरकार ने केंद्र से राज्य का आधिकारिक नाम “केरल” की जगह “केरळम (Keralam)” करने का प्रस्ताव पारित किया था, ताकि स्थानीय भाषा और पहचान को प्राथमिकता दी जा सके। इसी संदर्भ में दिल्ली के नाम परिवर्तन की चर्चा तेज हुई है।विपक्ष की प्रतिक्रियाविपक्षी दलों ने इस मांग को अनावश्यक बताया है। उनका कहना है कि सरकार को नाम बदलने की बजाय विकास, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। कुछ नेताओं ने इसे “ध्यान भटकाने की राजनीति” करार दिया है।क्या है प्रक्रिया?किसी राज्य या शहर का नाम बदलने के लिए संबंधित राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है। इसके बाद केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय की मंजूरी ली जाती है। अंतिम स्वीकृति के बाद राजपत्र अधिसूचना जारी होती है।
आगे क्याफिलहाल दिल्ली के नाम परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक प्रस्ताव विधानसभा में नहीं लाया गया है। हालांकि, इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर तेज हो गई है।राजधानी का नाम बदलेगा या नहीं, यह आने वाले समय में राजनीतिक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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