भाजपा का ‘ट्रिपल S’ फॉर्मूला: अखिलेश के PDA को चुनौती देने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को काउंटर करने के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसे ‘ट्रिपल S’ फॉर्मूला नाम दिया गया है।

क्या है ‘ट्रिपल S’ फॉर्मूला?

सूत्रों के अनुसार, भाजपा का ‘ट्रिपल S’ फॉर्मूला सामाजिक समीकरणों को साधने और विभिन्न वर्गों में पकड़ मजबूत करने पर आधारित है। पार्टी इस रणनीति के जरिए गैर-यादव पिछड़ों, गैर-जाटव दलितों और अन्य वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

संघ की अहम भूमिका

इस पूरी रणनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संघ जमीनी स्तर पर फीडबैक जुटाकर भाजपा नेतृत्व को देगा, जिससे चुनावी रणनीति को और धार मिल सके।

योगी की सक्रियता

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस रणनीति को लागू करने में सक्रिय नजर आ रहे हैं। खबर के अनुसार, उन्होंने अब तक छह अहम बैठकें कर संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया है।


PDA बनाम ‘ट्रिपल S’

जहां एक ओर समाजवादी पार्टी PDA फॉर्मूले के जरिए सामाजिक गठजोड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं भाजपा ‘ट्रिपल S’ के माध्यम से उसे संतुलित करने की कोशिश कर रही है। इससे प्रदेश की राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।

आगे क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इन दोनों रणनीतियों का असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई देगा। भाजपा और सपा के बीच यह सामाजिक समीकरणों की लड़ाई निर्णायक साबित हो सकती है।


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