चैत्र नवरात्र में देवी के गौरी स्वरूप के दर्शन पूजन का विधान है। मां के गौरी स्वरूप के दर्शन के क्रम मे प्रथम दिन मांमुखनिर्मलिका गौरी के दर्शन किए जाते है। नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने गायघाट स्थित मुखनिर्मलिका गौरी मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन-पूजन किए। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। गायघाट स्थित मुखनिर्मलिका गौरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विशेष धार्मिक मान्यता के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मान्यता है कि वासंतिक नवरात्रि के प्रथम दिन माता के दर्शन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
मुखनिर्मलिका गौरी को सौभाग्य की देवी माना जाता है। ऐसी आस्था है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में मत्था टेकता है और विधि-विधान से पूजन-अर्चन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।नवरात्रि के अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना हुआ है। भक्त नारियल, फूल और चुनरी अर्पित कर माता से अपने परिवार की खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं।

