भारत–नेपाल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ में काव्य, गीत और नृत्य की छटा, श्रोता हुए भावविभोर

महानगर के रामकटोरा स्थित काशी सेवा समिति के महामना मालवीय सभागार में आयोजित भारत–नेपाल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान समारोह के प्रथम और द्वितीय दिन काव्य, गीत, ग़ज़ल, वादन और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में भारत और नेपाल से आए साहित्यकारों, कलाकारों और विद्वानों ने अपनी प्रस्तुति से आयोजन को यादगार बना दिया।दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ फिरोजाबाद के पूर्व सांसद एवं अंतरराष्ट्रीय कवि प्रो. ओमपाल सिंह ‘निडर’ और नेपालगंज (नेपाल) के प्रो. हरिप्रसाद तिमिलसिना ने मां भारती के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पुरातन दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने की। अपने संबोधन में वक्ताओं ने भारत और नेपाल के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच प्रेम, सहयोग और भाईचारे को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में मां वीणा वादिनी का आवाहन काशी हिन्दी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ. गिरीश पाण्डेय ‘काशिकेय’ और इन्द्रजीत तिवारी ‘निर्भीक’ ने किया। इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन, गायन-वादन, कत्थक, फोक और नेपाली लोक नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस अवसर पर कई साहित्यकारों और कलाकारों ने अपनी काव्य और कला प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।कार्यक्रम में स्वागत संबोधन उषा साह (कोलकाता) ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मुख्य संरक्षक डॉ. राम अवतार पाण्डेय एडवोकेट ने दिया।



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